Shri SaiDham Sirali
सबका मालिक एक‌
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" ग्यारह वचन‌ "

जो शिरडी मेँ आएगा,
आपद दूर भगाएगा ।

चढ़े समाधी की सीड़ी पर,
पैर तले दु:ख की पीड़ी पर ।

त्याग शरीर चला जाउंगा,
भक्त हेतु दौड़ा आउंगा ।

मन में रखना दृढ़ विश्वास,
करे समाधी पूरी आस ।

मुझे सदा जीवित ही जानो,
अनुभव करो सत्य पहचानो ।

मेरी शरण आ खाली जाए,
हो कोई तो मुझे बताए ।

जैसा भाव रहा जिस जन का,
वैसा रूप रहा मेरे मन का ।

आ सहायता लो भरपूर,
जो मांगा वो नहीं है दूर ।

भार तुम्हारा मुझ पर होगा,
वचन ना मेरा झूठा होगा ।

मुझ मे लीन वचन, मन, काया,
उस का रिण ना कभी चुकाया ।

धन्य धन्य वो भक्त अनन्य,
मेरी शरण तज जिसे ना अन्य ।
"स्तुति"

नमो जगगुरुम् ईश्वरम् साईंनाथम् ,
पुरुषोत्तम सर्वलोकम् प्रकाशम् !
चिदानंद रूपम् नमो विश्व आतम् ,
योगीश्वरम् करूणाकरम् साईंनाथम् !!
"दैनिक‌ कर्म‌"

काकड़ आरती (5:15 प्रात:काल)
माखन मिश्री का भोग‌
मंगल स्नान (अभिषेक)
बाल भोग(हलवा)(9:00 प्रात:काल)
श्रृंगार आरती(संक्षिप्त आरती)
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ‌
साईं सच्चरित्र का पाठ
कनकधारा स्त्रोत का पाठ
श्री सुक्त पाठ
श्री पुरुषोक्त पाठ
भोग (गुरुवार को विशेष खिचड़ी)(12:00 मध्यान काल)
मध्यान आरती
धूप आरती (5:30 सायं काल सूर्यास्त के अनुसार)
दूध हलवे का भोग‌
भजन संगीत‌
भोग(सम्पूर्ण भोजन)
शेज आरती (10:00 रात्रि काल‌)