Daan
सबका मालिक एक‌

ॐ साईं राम

दान मनुष्यों का परम धर्म है | दान ही मनुष्य को जीवन मे त्याग सिखाता है मनुष्य ने प्रकृति सिखा कि प्रकृति प्रदत्त वस्तु जितनी मेरी उतनी तेरी व उतनी दूसरे की प्रकृति भी हमें प्रेरणा देती है | प्रकृति से हमें हवा, धूप, जल, शीतलता, ताप सब कुछ बिना मूल्य प्राप्त होता है | आकाश के बादल जल दान कर वसुन्धरा को सस्यश्यामल बनाते है | धरती हमें अपार खनिज पदार्थ व द्रव्य वस्तुएँ दान करती है | इस महादान का हम कौन सा मूल्य चुकाते हैं |  बाबा ने कहा है कि मानव शरीर हमें दान पुण्य और परोपकार के लिये ही मिला है, अत: लोक कल्याण के लिये हमे निरंतर दान करते रहना चाहिये | जैसे हम पृथ्वी में एक दाना डालते हैं और पृथ्वी माता (जगत जननी) हमे अनेक गुना करके लौटाती है | ऐसे ही बाबा "श्री साईं नाथ" कहते है : तुम मुझे एक रुपया दान करते हो और  मुझे उसे अनेक गुना करके वापस देना होता है |

धनराशि दान हेतु इच्छुक व्यक्ति निम्न खातों पर दान कर सकते हैं :


  • भारतीय स्टेट बैंक‌
    शाखा: सिराली (म. प्र.)
    खाता क्र: 11705780181
  • बैंक आफ इंडिया,
    शाखा: सिराली (म. प्र.)
    खाता क्र: 954220110000001
  • " ग्यारह वचन‌ "

    जो शिरडी मेँ आएगा,
    आपद दूर भगाएगा ।

    चढ़े समाधी की सीड़ी पर,
    पैर तले दु:ख की पीड़ी पर ।

    त्याग शरीर चला जाउंगा,
    भक्त हेतु दौड़ा आउंगा ।

    मन में रखना दृढ़ विश्वास,
    करे समाधी पूरी आस ।

    मुझे सदा जीवित ही जानो,
    अनुभव करो सत्य पहचानो ।

    मेरी शरण आ खाली जाए,
    हो कोई तो मुझे बताए ।

    जैसा भाव रहा जिस जन का,
    वैसा रूप रहा मेरे मन का ।

    आ सहायता लो भरपूर,
    जो मांगा वो नहीं है दूर ।

    भार तुम्हारा मुझ पर होगा,
    वचन ना मेरा झूठा होगा ।

    मुझ मे लीन वचन, मन, काया,
    उस का रिण ना कभी चुकाया ।

    धन्य धन्य वो भक्त अनन्य,
    मेरी शरण तज जिसे ना अन्य ।
    "स्तुति"

    नमो जगगुरुम् ईश्वरम् साईंनाथम् ,
    पुरुषोत्तम सर्वलोकम् प्रकाशम् !
    चिदानंद रूपम् नमो विश्व आतम् ,
    योगीश्वरम् करूणाकरम् साईंनाथम् !!
    "दैनिक‌ कर्म‌"

    काकड़ आरती (5:15 प्रात:काल)
    माखन मिश्री का भोग‌
    मंगल स्नान (अभिषेक)
    बाल भोग(हलवा)(9:00 प्रात:काल)
    श्रृंगार आरती(संक्षिप्त आरती)
    विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ‌
    साईं सच्चरित्र का पाठ
    कनकधारा स्त्रोत का पाठ
    श्री सुक्त पाठ
    श्री पुरुषोक्त पाठ
    भोग (गुरुवार को विशेष खिचड़ी)(12:00 मध्यान काल)
    मध्यान आरती
    धूप आरती (5:30 सायं काल सूर्यास्त के अनुसार)
    दूध हलवे का भोग‌
    भजन संगीत‌
    भोग(सम्पूर्ण भोजन)
    शेज आरती (10:00 रात्रि काल‌)